

पीलीभीत में वन माफिया ना की वन सम्पदा को दीमक क़ी तरह खोखला करने जुटे हुए है बल्कि उत्तरप्रदेश राजस्व को भी भारी क्षति पंहुचाने का काम कर रहे है.सदर तहसील में अधिकारियो की मिलीभगत के चलते 18 लाख की नीलामी औने पौने दामों में कर दी गई.जबकि हरे भरे विशाल इन पेड़ो क़ी कीमत का बिना हाल आंकलन ठेकेदार को देने का मामला सामने आया है, फिलहाल पीलीभीत DM ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तीन सदस्यों क़ी टीम जांच के लिए निर्देशित किया था, मगर अफ़सोस कि ना तो अब तक कोई जाँच रिपोर्ट सौपी गई है और ना तो कोई कार्यवाही हुई.
उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में वन विभाग और तहसील प्रशासन ने लाखो क़ी संपत्ति औने पौने दामों में नीलामी कर दी हीं.दरअसल ये मामला ललौरीखेड़ा ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम गौनरी का है.जहाँ के निवासी पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य ने मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल (IGRS) पर शिकायत दर्ज कराई थी.जिसमे बताया गया कि ग्राम पंचायत के गाटा संख्या 79 जोकि खलिहान भूमि में दर्ज माल अभिलेख है.इस भूमि पर ढाई दशक से नीलगिरी यूकेलिप्टस के पेड़ मौजूद थे,आरोप है कि बिना किसी आधिकारिक मूल्यांकन एवं बिना भूमि प्रबंधक समिति बैठक के इन पेड़ो को औने-पौने दामों में चहेते ठेकेदारों(वन माफियाओ)को बेच दिया गया।अनुमानतः 18 लाख रुपये की कीमत के इन सरकारी वन सम्पदा को अधिकारियो ने बेच दिया है.इससे ना कि ग्रामपंचायत को भारी क्षति पंहुचा है वही राजस्व विभाग के अधिकारियो क़ी संलिप्तता भी दिखाई दे रही है.इस पूरे मामले को संज्ञान लेने के बाद जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने बीते 10 जुलाई को मामले क़ी जाँच के निर्देश दिए थे,जिसमे 3 सदस्य डीएफओ (सामाजिक वानिकी),सदर तहसीलदार एवं DPRO(जिला पंचायत राज अधिकारी)टीम का गठन किया गया है,इन को संयुक्त रूप से जांच करके रिपोर्ट पेश करने के लिए निर्देशित किया गया, मगर आज लगभग 2 माह होने को है डीएम के निर्देशों को ताख पर रखकर सम्बंधित जाँच अधिकारी चैन क़ी नींद ले रहे है.जबकि मामला यूपी राजस्व से जुडा हुआ है.
बड़ी बात ये है कि राजस्व,वन और विकास विभाग के अधिकारियो के सरक्षण में चल रहे इस खेल पर कार्यवाही क्यों नहीं क़ी गई.उत्तरप्रदेश राजस्व को सम्बंधित अधिकारी पलीता लगाते रहे और अब IGRS पर शिकायतकर्ता ने शिकायतकर्ता कर दी तो खानापूर्ति के लिए जाँच प्रक्रिया क़ी जा रही है..
9410895775..

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